श्री भक्तमाल

भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर नाम बपु एक।
इनके पद बंदन किएँ, नासत बिघ्न अनेक।।

कथाएं

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सतां प्रसंगान्मम वीर्यसंविदो भवन्ति ह्रत्कार्णरसायना: कथा: |

तज्जोषणादाश्वपवर्गवर्त्मनी श्रध्दा रतिर्भक्तिरनुक्रमिष्यति ||

भगवान कहते है सत्पुरुषों के संग से मेरी कथाएं ह्रदय और कानों के लिए रसायन बन जाती है और उनके सेवन से शीघ्र ही अपवर्ग – मार्ग के प्रतिक्रम से श्रद्धा, रति और भक्ति का अभिर्भाव होता है |

श्रीभगवान राधा कृष्ण की असीम कृपा से, संतों की कृपा व पूर्व जन्मों के किसी अच्छे पुण्य कर्मों की वजह से मुझ अधम जीव में भक्तों का यश गानें की सौभाग्यशाली प्रेरणा का संचार हुआ |

भक्तमाल इस कलयुग में भगवद प्राप्ति का सरल साधन है | इसको सुनने और सुनाने वाले दोनों इस संसार सागर में डूबने से बच जाते है | इसके श्रवण से उन्हें हरी भक्ति रूपी जहाज आसानी से भवसागर से पार उतार देता है | संतों की कथा ही संतों का संग है श्री हरी संतों को प्यारे है और श्री हरी को संत प्यारे है | भक्तमाल से हमें भगवन और भक्त दोनों की कृपा एक साथ ही मिल जाती है | यदि भक्तमाल को हम अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर लें तो भगवन की प्रेमा भक्ति हमसे दूर नहीं रह सकती | मैंने अपने जीवन में भक्तमाल के श्रवण-कीर्तन से जो पाया है उसे वर्णन नहीं किया जा सकता वहअनुभव की वस्तु है | ऐसी आशा करता हूँ कि आप भी प्रतिदिन अपना बहुमूल्य समय निकालकर इसका श्रवण करेंगे |

“जय श्री राधे”